Thursday, March 19, 2009

फैशन के इस दौर में ढ़के तन की इच्छा न करें!


प्रिय पाठकों मैं एक सीधा-साधा ठेठ देहाती ठहरा। बचपन से ही गाँव की मिट्टी में खेला और और पला बढ़ा हुँ। गाँव की संस्कृति और रहन-सहन मेरे अंदर कूट-कूट कर भरी पड़ी है। पढ़ाई-लिखाई नाम मात्र का किया और ज्यादा वक्त खेतों और खलिहानों में व्यतित किया। लेकिन बेगारी और गरीबी ने मजबूर का दिया गाँव छोड़ने को। अपने छोटे से दिल में बड़ा सा अरमान लेकर मैं चल दिया शहर की ओर्। शुरू-शुरु में तो काफी दिक्कतें आई, लेकिन धीरे-धीरे मैं भी शहरी आव-भाव और संस्कृति में सराबोर हो गया। इन सब के बीच कभी-कभी बस मुझे याद आ जाती थी, गाँव की हरियाली और लोगों का प्यार। लेकिन समय के मार ने मानों मुझे अपंग बना दिया हो। मैं चाहकर भी नहीं जा सकता था, अपने गाँव की ओर्।
पिछले कुछ सालों में मैं कई शहरों में गया, लेकिन इन सभी जगहों पर सबसे ज्यादा चिंतित मुझे वहाँ के पहनावे और संस्क्ड़ड़ति ने किया। आज जिस तरह से फैशन का जादू लागों के सिर चढ़ कर बोल रहा है, खासकर (लड़कियों) वह वास्तव में चिंता का विषय है। शहरी पहनावे को देख कर शायद भगवान भी शरमा जाए, उन्हें भी अपनी कृति पर शर्म आती होगी।
मैं तो कहता हुँ, भैइया अगर जाड़े का मौसम न होता तो शायद नग्न तन भी देखने को मिल जाता। जहाँ तक मेरा विचार है, इस तरह के फैशन को सबसे ज्यादा लड़कियों ने ही अपनाया है। आज लड़कों को यह तय करना मुश्किल हो जाता है, कि कौन-सा कपड़ा खरीदें, क्योंकि लड़कियों ने कुछ छोड़ा ही नहीं है।
शहर में भविष्य का आगमन भी हो चुका है। लोगों को अब ना तो शीतलहर का डर है और न ही मोटे-मोटे कई कपड़े पहनने का झंझट है। अब तो वो आजाद है, पहनने को वो सारी वस्त्र जो उनके शरीर को ढ़कने की अपेक्षा खुला ज्यादा रखता है।
ऐसे में मैंने भी अपना रास्ता साफ करते हुए काम से छुट्टी ले ली है, और कुछ दिनों के लिए ही सही मगर ऐसी चिंता से मुक्ति तो मिलेगी। आपलोगों से भी यह अपील है कि अगर शहर की संस्कृति और कला को संचित करना है, तो तबियत से एक कदम आगे बढ़ाए।
विकास कुमार

Friday, December 26, 2008



शांत हो जा पाकिस्तान
शांत हो जा पाकिस्तान नहीं तो हर हिन्दुस्तानी की कसकर पडेगी लात भुल जाएगा युद्ध करने की बात्।
पाकिस्तानी सेना के सेनापति महोदय कयानी सहाब सम्भल जाएँ, बहुत सह लिया हिन्दुस्तान ने। आप क्या समझते है,आपका खुन-खुन है हमारा खुन पानी। हमारे देश के युवा के पास खुन का एसिड है जो एक कतरा भी तुम्हारे ऊपर गिर जाएगा तो जल जाओगे समझे।
मुशर्रफ़ कहाँ तु भुल रहा है आज कैमरे के सामने हिन्दी बोल रहा है,जो तु हिन्दी बोल रहा है वो भी हिन्दुस्तान की है। कारगील युद्घ में जब तुझे मुहँ पर पडी थी लात। आज फिर खाने का मन कर रहा है तुझे शर्म नहीं आई ये बोलते हुए कि हिन्दुस्तान की औकात नहीं हमला करने की। अबे यदि हमला कर दिया न तो सब अपने शोचालय मे बंद नज़र आओगे। और तु किस जनता पर उछल रहा है, मुशर्रफ़ जिसने तुझे लात मारकर देश से भगा दिया।
भारत जिसे की हर क्षेत्र मे महारत हासिल है, चाहे वो कुरुक्षेत्र हो या शिक्षा, हर में हम तुमसे आगे हैं।
हमारे देश के जितने युवा आज स्कूल काँलेजों में पढ़ रहे है। उन्हे यदि छोड़ दिया जाए तो शायद तुम्हारे हर एक सैनिक का चिकेन जैसी हालत बना देंगें हर साइज में काटेंगे समझे।
अभी भी वक्त है, सम्भल जा पाकिस्तान नहीं तो बर्बाद कर देंगे बहुत तेरे साथ प्यार भरी बातें कर लीं। शायद तुझे पता नहीं हमारा देश पहले बात करता है, नहीं समझे तो लात मारना भी जानता है। तु किस पर उछल रहा है, अमेरिका पर या अपने घरोंदे दुश्मन तालीबान पे। जब गोली खाने का वक्त आएगा तो तेरे पास कोई नहीं नज़र आएगा।
लगता है हमारे देश के युवा के लिए वह समय आ गया है जब हम सभी युवा, पाकिस्तान के लाहोर, करांची मे ………… करने जाएंगे।

राकेश कुमार
पिसु अध्यक्ष

Thursday, December 25, 2008

जरदारी! जंग की तैयारी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी खुलेआम जंग का ऐलान कर रहें हैं। उन्होने एक संवाददाता सम्मेलन मे यह कहा की पाकिस्तान को भी कम नहीं आके हमारी सेना युद्घ के लिए तैयार है। यह वक्तव्य उस समय आया है, जब भारत के प्रधानमंत्री ने युद्घ की आशंका को दुर किया है। उन्होने आतंकवादी ढाँचे को धवस्त करने की माँग अंतराराष्ट्रीय समुदाय के सामने की है।
शायद लगता है जरदारी ने कभी युद्घ नही देखा है तभी तो करने को तुले है। युद्घ में जरदारी उन ताकतों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उनकी बीवी के हत्या के जिम्मेदार थें, उनके साथ मिलकर युद्घ के लिए तैयार हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के चीफ बैतुल्ला महसूद ने दावा किया है कि हमारे हथियार बंद लडाके तैयार है। शायद जरदारी भारत को हल्का समझने लगे है। जरदारी को इतना सोच लेना चाहिए कि पाकिस्तान की सक्रिय फोज 6,19,000 है और भारत के पास विश्व की तीसरी सबसे बडी फोज लगभग 14,14,000 सक्रिय सैनिक है। भारत के रिजर्व बल-12,00,000 है और वही पाकिस्तान के रिजर्व बल -5,12,800 है, तब भी जरदारी किस चीज का रौब दिखा रहे है। जितने पाकिस्तान में सैनिक है उतना भारत के जेलों में बंद कैदी हैं जिन्हे यदि छोड़ दिया जाए तो पाकिस्तान के लिए सरदर्द बन सकते है। भारत से जरदारी किस सबूत की माँग कर रहे है, कि आतंकी हमारे देश के है या नहीं? तो पाकिस्तान खुद हि जाँच कर ले!
आखिर किस हैसियत से पाकिस्तान जाँच करेगा जब जरदारी अपने बीवी के हत्यारे को अभी तक नहीं पकड सके और हत्यारे के साथ मिलकर भारत से युद्घ करने को तैयार है, तो किस हैसियत से जाँच करेगें। बेनजीर भुट्टो की हत्या और जरदारी का राष्ट्रपति के गद्दी पर बैठना जरदारी को भी बनजीर की हत्या में शामिल होने का संकेत देता है। क्योंकि सत्ता के लिए कोई भी किसी भी हद तक गिर सकता है। हमारा देश शांति प्रिय देश है, जो कि युद्घ नहीं करना चाहता है। लेकिन भारत को युद्घ के लिए उकसाना पाकिस्तान को बहुत महंगा पड़ सकता है। शायद जरदारी अजगर के रुप को नही जानते वो भी बहुत शांत रहता है और जब गुस्सा आता है तो सामने वाले को निगल जाता है उनकी हड्डियाँ तक नहीं छोडता है।
राकेश कुमार

पिसु अध्यक्ष

Wednesday, December 24, 2008






शायद मेरा नहीं
मैं वह हुँ जो अपने आपको बहुत कोसती हुँ, शायद दोनों मेरे नही है। हाँ, मैं बात कर रही हुँ- बाल और राज ठाकरे की। मेरी ही कोख से क्षत्रपति शिवाजी ने जन्म लिया उस कोख के ये नही हो सकते। मै बहुत दुखी हुँ, मेरे छाती पर चढकर आतंकीयों ने मेरे बच्चों पर हमला किया और ये दोनों मेरे आंचल को पकडकर मेरे हि बच्चों का गला दबाने का साहस कर रहे हैं। शायद इन्हें यह नहीं पता कि मैं ही हुँ, जो पूरे देश की आर्थिक स्थिती को बना के रखती हुँ। पुरा देश मेरे उपर गर्व करता है, लेकिन ये मेरे शरीर के अंदर दो घाव निकल आए हैं, जो धीरे-धीरे मेरे अंदर की शक्ति को खाते जा रहे है। मैनें कभी सोचा भी नही था कि मेरे हि अपने मेरे उपर ज़ुल्म करेंगें। आज जब हमारा राष्ट्रगान गाया जाता है तो पूरा भारत सीधा खाडा होकर पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा गाता है तो मुझे बहुत हि आंनद आता है। क्योंकि इसमें मराठों को पूरे देश से जोडने की बात की है और मेरे ये दोनो हि पूरे महाराष्ट्र को बर्बाद करने मे तुले है मेरे नासमझ बच्चों को भी इन्होंने अपनी गंदी राजनीति का छिंटा लगाने में कोई कमीं नहीं रखी है। मै तो माँ हुँ जो कभी गलत नहीं देखना चाहती शायद वो वक्त आ गया है जब मेरे बच्चे मिलकर इन कौरव चाचा-भतीजे का अंत करेंगे तभी मेरी मन को शांती मिलेगी। जब कोई बच्चा अपने माँ की इज्जत बर्बाद कर रहा होता है तो माँ के लिए महासुर बन जात है और वही महासुर चाचा भतीजे बन चुके है और इनका अंत जरुरी है।
राकेश कुमार
पिसु अध्यक्ष



गजनी का ग्रहण टला
आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म गजनी पर मंडरा रहे "रोक" के काले "बादल" रीलिज़ के ठीक एक दिन पहले मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद छट गए।
रीलिज़ से पहले ही यह फिल्म आमिर खान की हेयर स्टाईल को लेकर चर्चा में रही। दक्षिण भारत की इस रीमेक के वितरक उस वक्त सकते में आ गए, जब इसके रीलिज़ पर रोक लगा दी गई।
रोक हटने के बाद वितरकों के साथ-साथ इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे दर्शकों ने भी राहत की सांस ली।
लेकिन इस सारे घटनाक्रम से कई सारे सवाल भी उठते हैं, पहला सवाल तो काफी पुराना है जो कि फिल्म पब्लिसीटि से जुडा हुआ है, कि क्या जानबूझकर आमिर अपनी फिल्मों को रीलिज़ से पहले विवादों से जोडते है, क्योंकि उनकी पिछली दो फिल्में 'मंगल पांडे' और 'फना' भी विवादों में रही थीं। फना के वक्त तो बकायदा आमिर सामाजिक कार्यकर्ता बन गएं थे और नर्मदा बचाओं आंदोलन के समर्थन में उतर आए थे। इस बार सडकों पर बाल काटते नज़र आए, लेकिन फिल्म के रीलिज़ से ठीक पहले इस तरह की मुकदमेंबाजी अब आम बात होती जा रही है।
इस प्रकार अब प्रचार के लिए कोर्ट को भी लोग नही छोड रहे हैं। ऐन मौके पर याचिका दाखिल होना, फिल्म पर रोक लगना, मीडिया में मुफ्त फिल्म का प्रचार होना, और अंत में रीलिज़ से ठीक कुछ घंटों पहले आपस में ही मसला सुलझा लेना, एक सोची समझी मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा है, जो कि आनेवाले समय में और बढेगा, क्रेजी 4 हालिया इसका उदाहरण है, जिसका समझौता कोर्ट के बाहर हुआ था।
कहीं न कहीं भारत में न्यायालयों को इस पर ध्यान देना होगा, और इस पर उचित कारवाई भी करनी होगी, ये सारे घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि कैसे न्यायिक व्यवस्था का मखौल उडाया जा है।

विशाल तिवारी
पिसु सदस्य

Monday, December 22, 2008








बाल के खाल बाल ठाकरे
अपनी खोखली राजनीति और बेवजह के फालतू ब्यान देने वाले हमारे देश के सबसे बडे नेता और अपने आपको तिस मार खाँ समझने वाले बाल ठाकरे जिन्हे जनता सिर्फ यह मानती है कि, जब आप शादी या पार्टी कर रहे होते है और कोई महानुभाव वहाँ बिना निमंत्रण के पहुँच के आपको पार्टी की कमियाँ गिनाए वैसे हि हमारे देश के ये चाचा-भतीजे हैं जो कि सिर्फ बोलना जानते हैं। शायद बाला साहब यह नहीं जानते है कि भारत ने जब पाकिस्तान से 20 आतंकवादीयों की माँग की तो पाकिस्तान ने राज ठाकरे की माँग कर दी। उस दिन राज ठाकरे अखबारों में भी नज़र नहीं आ रहे हैं।
जब मुम्बई में सरेआम आतंकी मासूमों को मौत के घाट उतार रहे थे तब आप कहां थे और आपके सैनिक कहाँ थे, चलिए छोड़िए वैसे आप से बडा आतंकी बोली बोलने वाला नेता शायद तो नहीं है, वैसा आपका भतीजा जन्म लेने की कोशिश कर रहा है। मैं आपको बताना चाहूँगा कि हमारे देश में कानून है और कानून सबसे सर्वोपरी है। बाला साहब के कथनानूसार “आतंकवादी कसाब को सरेआम फांसी दे देनी चाहिए। अब उस पर केस चलाने की जरुरत नही है”। यह एक ऐसा शक्स बोल रहा है जिसने क्षेत्रवाद के नाम पर कितने मासूमों का खून बहाया है और आप ही उस आतंकवाद के खिलाफ कैसे बोल रहे है। शायद पाकिस्तान के द्वारा 20 आतंकवादियों के बदले राज ठकरे की माँग कोई गलत नहीं है। राज ठाकरे के साथ बाल ठाकरे को फ्री में दे देना चाहिए। कम से कम हमारे इस शांति प्रिय देश से बातूनी नेता तो कम होगा।

राकेश कुमार

पिसु अध्यक्ष

Tuesday, December 16, 2008






(कविता)
भोग से शोक तक
निकम्मी सरकार
देश के गद्दार
करते है सच्चाई से इंकार
कुर्सी से है प्यार
जनता से है तकरार
काम से है इंकार
नोटों से है प्यार
करते है दुश्मनों से प्यार
शहीदों की करते है इज्जत तार-तार
तब बनती है सरकार
नेताओं की निकलती है कार
वोटों का है बुखार
जनता का जीना हुआ दुश्वार
एम.एस.कडारी